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ना पगार बची और ना पैसा है, 42 डिग्री गर्मी में 1200 किमी दूर घर के लिए निकले प्रवासी मजदूर

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हितेश चावड़ा, खेड़ा: गुजरात की अंतर-राज्यीय सड़कों पर श्रमिकों को घर लौटते देखकर ऐसा लगता है कि मानो रूपानी सरकार की संवेदनशीलता कहीं खो गई है. लॉकडाउन के 39वें दिन चिलचिलाती गर्मी में अपने घर जाते हुए लोगों को सड़क पर देखा जा सकता है. अहमदाबाद-इंदौर हाईवे पर 42 डिग्री की गर्मी में अपने घर लौट रहे मजदूरों के पास अब घर ले जाने के लिए वेतन और पैसा नहीं है.

गुजरात को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मजदूर दिन रात अपना पसीना बहाते हैं. लॉकडाउन के बाद खड़ी हुई स्थिति और सरकार की संवेदनशीलता की कमी के कारण प्रवासी मजदूर हजारों किमी दूर अपने घर पैदल चलकर जाने को मजबूर हो गए हैं. अहमदाबाद-इंदौर हाईवे पर कठलाल के लसुंदरा रोड पर मध्य प्रदेश जा रहे टाइल्स कर्मचारी लक्ष्मण भाइ ने कहा,  “मैं मोरबी टाइल्स के कारखाने में काम करता हूं. मेरा गृहनगर इंदौर है और हम घर जा रहे हैं. कंपनी ने भोजन की व्यवस्था की, लेकिन वर्तमान वेतन का भुगतान नहीं किया, हमारे अन्य लोग भी घर चले गए हैं, इसलिए हम व्यवस्था की कमी के कारण पैदल चलकर जा रहे हैं. कारखाने में 60 लोग काम कर रहे थे, उनमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश के हैं और अब हमें नहीं पता कि कारखाना कब शुरू होगा और कब वापस आएंगे.”

सड़क पर 42 डिग्री की गर्मी के बावजूद मजदूर अपने गृहनगर की ओर चल रहे हैं, जिसमें अंबिका नगर में रावी एस्टेट में एक स्टील कंपनी में काम करने वाले एक कार्यकर्ता ने कहा कि वे अहमदाबाद से उत्तर प्रदेश की ओर चल रहे हैं. वे उसी जिले के लोग हैं जिसमें 8 पुरुष हैं, इमें हम 3 एक गांव के हैं और अन्य दूसरे गांव के हैं. मजदूर ने कहा कि हमारा गांव अहिया से 1200 किलोमीटर दूर है और हम चलेंगे. कंपनी ने एक महीने का वेतन दिया जो इस महीने का भुगतान किया गया था और महीने के अंत के साथ पगार भी खत्म हो गई.

लॉकडाउन के बाद केवल जरूरी सामान वाले वाहन ही सड़क पर चल सकते हैं. यदि चालक एक दयालु आदमी है, तो वे ऐसी सड़कों पर चलने वाले लोगों को वह बचा सकता है. लेकिन फिर भी लोग चलने को मजबूर हैं. इनकी मूल जिम्मेदारी सरकारों और मालिकों की होनी चाहिए जिनकी लापरवाही के कारण है, यह स्थिति उत्पन्न हुई है. इस वजह से मजदूर सड़क पर चलने वाले एक मवेशी बन गए हैं, ना कि एक आदमी जिस पर संवेदनशीलता दिखाने वाला कोई नहीं है.

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