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अहमदाबाद में एक भी कोरोना अस्पताल के पास नहीं है फायर सेफ्टी का NOC

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अहमदाबाद: शहर के नवरंगपुरा इलाके में मौजूद श्रेय अस्पताल में लगने की घटना के बाद प्रशासन की पोल खुल गई है. अस्पतालों के अलावा, ऊंची इमारतों और होटलों में भी फायर सेफ्टी के नियमों का पालन नहीं किया गया है.

गुजरात के 11 हजार से अधिक अस्पतालों में से अधिकांश अस्पतालों के पास फायर विभाग की एनओसी भी नहीं है.

श्रेय अस्पताल के बाद हरकत में फायर विभाग 

मिल रही जानकारी के अनुसार बीते दिनों नवरंगपुरा के श्रेय अस्पताल में आग लगने की वजह से इलाज कराने वाले 7 मरीजों की मौत हो गई थी. घटना के बाद अहमदाबाद फायर विभाग की टीम हरकत में आ गई थी.

मिल रही जानकारी के अनुसार फायर की टीम एक के बाद एक अस्पताल को एनओसी के लिए नोटिस भेज रही है.

31 कोरोना अस्पतालों के पास नहीं फायर सेफ्टी की एनओसी 

अगर हम राज्य के 5 बड़े शहरों की बात करें तो सबसे पहले अहमदाबाद का नंबर आता है. यहां घोषित की गई 31 कोविड-19 अस्पतालों में से किसी के भी पास फायर सेफ्टी की एनओसी नहीं है.

वह भी ऐसे समय में जब अहमदाबाद के श्रेय अस्पताल में आग लगने की घटना घटित हो चुकी है. जिसके बाद सूरत का नंबर आता है जो इन दिनों कोरोना से प्रभावित जिलों में पहले पायदान पर है.

यहां कि 12 कोविड-19 अस्पतालों में से एक के पास भी फायर शेफ्टी की एनओसी नहीं है.

यह भी पढ़ें: बिना फायर NOC के चल रहा था अहमदाबाद का श्रेय अस्पताल: सूत्र

127 निजी अस्पतालों में चल रहा है इलाज 

गौरतलब है कि कोरोना के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, सरकार ने कोरोना संक्रमितों के उपचार के लिए 127 निजी अस्पतालों का चयन किया है.

इनमें से 55 यानी लगभग 92 फीसदी ऐसे अस्पताल हैं, जिनके पास फायर सेफ्टी एनओसी नहीं है. जिसकी वजह से यहां किसी भी वक्त बड़े दुर्घटना का खतरा बना रहता है.


उल्लेखनीय है कि गुजरात के 11,554 अस्पतालों में से 1,079 मल्टी-स्पेशिएलिटी अस्पताल हैं. जबकि 475 सरकारी अस्पताल हैं. 5,500 अस्पताल ऐसे हैं जिसमें 50 से कम बेड की व्यवस्था है.

जबकि करीब साढ़े चार हजार छोटे अस्पताल और निजी क्लीनिक हैं. इसके अलावा 4,500 छोटे अस्पताल और निजी क्लीनिक भी हैं. फायर एनओसी के मामले को लेकर छोटे और मध्यम अस्पतालों की स्थिति बद से भी बदतर है.

बना रहता है बड़े हादसे का खतरा 

फायर एनओसी को लेकर राज्य की छोटे और मध्यम अस्पतालों की हालत बद से भी बदतर है. इनमें से अधिकांश अस्पताल फायर विभाग की एनओसी लेते ही नहीं हैं. अगर लेते भी है तो उसको रिन्यू नहीं कराते.

अगर ऐसे में इन अस्पतालों में कोई बड़ा हादसा हो जाए तो हैरान मत होना.

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