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आगामी चुनावों में 65 साल से अधिक उम्र के वोटर को नहीं मिलेगी पोस्‍टल बैलेट की सुविधा

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कोरोना काल में भी देश के कई हिस्सों में आने वाले महीनों में चुनाव होने वाले हैं. बिहार भी उनमें से एक है. हालांकि कोरोना महामारी के बीच वोटिंग को लेकर समस्या खड़ी हो सकती है लेकिन पिछले दिनों खबरें थी कि 65 साल या उससे अधिक की उम्र के वोटरों को पोस्टल बैलेट की सुविधा मिलेगी लेकिन अब चुनाव आयोग ने इसको लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है.

अब चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि बिहार और अन्‍य स्‍थानों पर होने वाले चुनावों में 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को फिलहाल पोस्‍टल बैलेट सुविधा नहीं मिलेगी. इसके साथ ही चुनाव आयोग ने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में 80 वर्ष से ज्यादा आयु के मतदाताओं, दिव्यांगों और कोविड-19 मरीजों के लिए वैकल्पिक डाकमत की व्यवस्था होगी.

बुजुर्गों को है संक्रमण का ज्यादा खतरा

कोरोना काल में बड़ी चुनौती इस साल होने वाली बिहार विधानसभा चुनाव के तौर पर दिख रही है. खासतौर से बुजुर्गों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कैसे करेंगे लेकिन फिलहाल चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि महामारी के दौर में इनको कोई खास रियायत नहीं मिलने जा रही है. दरअसल संक्रमण का खतरा 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, गर्भवती महिलाओं, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और किडनी की बीमारियों सहित पुरानी बीमारी से ग्रसित लोगों के ज्यादा है. मेडिकल एक्सपर्ट्स और सरकार ने भी लगातार ऐसे लोगों को बाहर ना निकालने के लिए कहा है.

किसे मिलती है पोस्ट बैलेट की सुविधा?

भारतीय चुनावों में एक खास तबके को ही पोस्टल बैलेट की सुविधा मिलती है जिसके माध्यम से मतदाता अपने मदाधिकार का प्रयोग डांक के माध्यम से करते हैं. मौजूदा व्यवस्था में सेना, अर्ध सैनिक बलों के जवानों और विदेशों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों व निर्वाचन ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को ही पोस्टल बैलेट से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की छूट है.

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