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अवमानना केस: सुप्रीम कोर्ट से प्रशांत भूषण को नहीं मिली राहत, 17 अगस्त को होगी सुनवाई

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देश के जाने-माने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ अदालत की अवमानना के 11 साल पुराने मामले में सोमवार को सुनवाई हुई.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने अपनी सफाई रखी जिसे कोर्ट ने मंजूर करने से इनकार कर दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी.

11 साल पहले दिया था तहलका को इंटरव्यू 

दरअसल वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने 11 साल पहले तहलका को एक इंटरव्यू दिया था. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत के 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आधे भ्रष्ट थे.

आज होने वाली सुनवाई में कोर्ट को ये तय करना था कि इस में भूषण के स्पष्टीकरण को मंजूर करे या अदालत की अवमानना के लिए कार्रवाई को आगे बढ़ाए.

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2009 में होने वाली सुनवाई में नहीं मांगी थी माफी 

अदालत की अवमानना के 11 साल पुराने केस की इससे पहले 2009 में सुनवाई हुई थी. उस दौरान तहलका के संपादक तरुण तेजपाल ने कोर्ट से मांफी मांग ली थी.

लेकिन प्रशांत भूषण ने अपने बयान पर खेद जताया था, लेकिन उन्होंने बिना शर्त माफ़ी नहीं मांगी थी. उस दौरान कोर्ट में प्रशांत भूषण ने दलील देते हुए कहा था कि तब मेरे कहने का तात्पर्य भ्रष्टाचार कहना नहीं था बल्कि सही तरीके से कर्तव्य न निभाने की बात थी.

17 अगस्त को होगी मामले की अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने आज होने वाली सुनवाई में कहा कि वह इस मामले में विचार करेगा कि जजों के बारे में भ्रष्टाचार की टिप्पणी असल में अवमानना है या नहीं.

जस्टिस अरुण मिश्रा, जिस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को तय की है.

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ये भी कहा था कि हमारी मंशा अभिव्यक्ति की आजादी छीनना नहीं है, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी और कोर्ट की अवमानना के बीच एक बारीक रेखा है.

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