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गुजरात सरकार से नाराज प्राथमिक शिक्षक, विपक्ष ने भेदभाव का लगाया आरोप

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विशाल मिस्त्री, राजपीपणा: गुजरात के प्राथमिक शिक्षक लंबे समय से सरकार से नाराज हैं. इससे पहले शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन भी चलाया था. बावजूद इसके गुजरात के शिक्षकों के मुद्दे हल नहीं हुए. गुजरात के प्राथमिक शिक्षक वेतन के मामले को लेकर गुजरात सरकार से नाराज चल रहे हैं. जिसकी वजह से राज्य की विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं. कांग्रेस और बीटीपी शिक्षक के नाराजगी को लेकर एक हो गए हैं.

नर्मदा जिला के डेडियापाडा विधानसभा सीट के BTP विधायक महेश वसावा ने सीएम रुपाणी को आवेदन देकर कहा, “गुजरात के उच्च योग्य शिक्षकों को शुरू से ही अन्य राज्यों की तरह पूर्ण वेतन और 4200 ग्रेड-पे मिलना चाहिए. लेकिन सरकार के वित्त विभाग के विवादास्पद फैसले के कारण 9 साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षक को 4200 के बजाय 2800 ग्रेड-पे दिया है. जिसकी वजह से शिक्षकों में भारी नाराजगी दिखाई दे रही है.”

जबकि नांदोद विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक पी. डी वसावा ने भी इस मामले को लेकर सीएम रुपाणी को पत्र लिखा है. 2010 के बाद के प्राथमिक शिक्षकों को लगातार 9 साल तक नौकरी करने वाले प्रथम उच्च पगार के हिसाब से 2800 के मुताबिक, जबकि 2010 से पहले के प्राथमिक शिक्षकों को 4200 ग्रेड-पे के अनुसार वेतन दिया जाना चाहिए. एक ही वर्ग के शिक्षकों के बीच भेदभाव कर शिक्षकों को विभाजित करने की नीति रुपाणी सरकार अपना रही है. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार भेदभाव की नीति को छोड़कर सभी शिक्षकों को 4200 पे-ग्रेड के अनुसार वेतन दे.

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