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बाबा रामदेव के खिलाफ बिहार में केस दर्ज, राजस्थान में भी दर्ज होगा मामला

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बाबा रामदेव ने जब से ये ऐलान किया है कि उनकी कंपनी पतंजलि ने कोरोना वायरस की दवा बना ली है तब से उनके लिए सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पहले आय़ुष मंत्रालय और आईएमआरसी ने बाबा के दावे से अपना पल्ला झाड़ लिया और दवाई के प्रचार पर रोक लगा दी और अब राजस्थान सरकार ने बाबा रामदेव के कोरोना की दवा कोरोनिल खोजने के दावे को फ्रॉड करार दिया है. इसके ध्यान में रखकर राजस्थान सरकार बाबा रामदेव के खिलाफ केस दर्ज करने जा रही है.

उधर बाबा रामदेव के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर सीजेएम कोर्ट में मामला दर्ज कराया गया है. जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के भीखनपुर निवासी तमन्ना हाशमी ने ठगी-धोखाधड़ी को लेकर सीजेएम कोर्ट मे परिवाद दायर कराया है. इसमें उन्होंने पतंजलि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव, पतंजलि संस्था के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण को आरोपित बनाया है. सीजेएम कोर्ट ने मामले के ग्रहण के बिंदु पर सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि निर्धारित की है.

राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा का कहना है कि महामारी के समय बाबा रामदेव ने इस तरह से कोरोना की दवा बेचने की कोशिश की है, जो अच्छी बात नहीं है. रघु शर्मा ने कहा कि आयुष मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार बाबा रामदेव को आईसीएमआर और राजस्थान सरकार से किसी भी कोरोना की आयुर्वेद दवा की ट्रायल के लिए परमिशन लेनी चाहिए थी, मगर बिना परमिशन के और बिना किसी मापदंड के ट्रायल का दावा किया गया है, जो कि गलत है.

रघु शर्मा ने कहा कि हम कानूनी कार्रवाई करेंगे और हमारे एक डॉक्टर ने मुकदमा दर्ज कराया है उस मुकदमे के तहत भी करवाई करवाएंगे. उधर नेम्स विश्वविद्यालय में गुना कैंट को लेकर जाने वाले जयपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि मैं वहां पर इंचार्ज था और वहां पर किसी तरह की कोई दवा की ट्रायल के लिए हमसे इजाजत नहीं ली गई.

उधर बाबा रामदेव ने अपनी कोरोना की दवा से जुड़ा एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि आयुर्वेद का विरोध एवं नफरत करने वालों के लिए घोर निराशा की खबर. इस ट्वीट के साथ उन्होंने आचार्य बालकृष्ण का एक ट्वीट संलग्न किया है जिसमें आयुष मंत्रालय ने कहा है कि उसे दवा के क्लीनिकल ट्रायल संबंधी सभी दस्तावेज मिल गए हैं.

मालूम हो कि मंगलवार को बाबा रामदेव ने कोरोना वायरस की दवा कोरोनील को बनाना का दावा किया. पतंजलि के मुताबिक, उन्होंने अपने ट्रायल में पाया कि कोरोना के मरीज कोरोना की दवा से 7 दिनों के अंदर 100 फीसदी ठीक हो गए जबकि इस दौरान कोई मौत नहीं हुई. हालांकि आयुष मंत्रालय ने पतंजलि के दावों के साक्ष्य मांगे हैं.

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