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निलंबित होने के बाद भी सदन में मौजूद सांसद, एक बार फिर से कार्यवाही स्थगित

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  • सुबह से राज्यसभा की कार्यवाही 4 बार हो चुकी है स्थगित
  • निलंबित होने के बाद भी सदन से बाहर नहीं निकल रहे सांसद
  • सदन में निलंबित सांसद कर रहे हैं सरकार के खिलाफ नारेबाजी
  • टीएमसी ने अध्यक्ष की भूमिका पर उठाया सवाल

राज्यसभा में कृषि बिल पर रविवार को चर्चा के दौरान हंगामा और उपसभापति के साथ अमर्यादित आचरण करने वाले 8 सांसदों को अगले हफ्ते तक सस्पेंड कर दिया गया है.

निलंबित होने के बावजूद भी सांसद सदन में मौजूद है और सरकार के खिलाफ हंगामा कर रहे हैं. नियमों के तहत निलंबित सांसद सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकते.

लेकिन सभापति की इस कार्रवाई के बाद भी सांसद सदन से नहीं निकल रहे हैं. जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही सुबह से चार बार स्थगित हो चुकी है.

सस्पेंड सांसद राज्यसभा में कर रहे हैं हंगामा

राज्यसभा में हंगमा करने वाले 8 विपक्षी सदस्यों को सस्पेंड करने के दौरान सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि कल जो कुछ सदन में हुआ वह बहुत बुरा था.

हंगमा के दौरान माइक तोड़ दिया गया पेपर फेंका गया यहां तक कि उपसभापति को धमकी भी दी गई उन्हे अपनी जिम्मेदारी को निभाने से रोकने की कोशिश की गई जो निंदनीय है.

उन्होंने हंगामा करने वाले 8 सदस्यों को सदन से एक हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया और उपसभापति के खिलाफ पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव भी खारिज कर दिया.

वैंकेया नायडू ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में नहीं है और इसके लिए जरूरी 14 दिनों के समय का भी पालन नहीं किया गया है.

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इन सदस्यों को किया गया सस्पेंड

कृषि विधयक का विरोध करने के बाद जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनके नाम इस प्रकार हैं. तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन. कांगेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा.

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह. माकपा के केके रागेश और इलामारम करीम शामिल हैं. निलंबन का फैसला सुनाने के दौरान भी राज्यसभा में हंगामा जारी रहा.

टीएमसी सांसद ने अध्यक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल

लोकसभा और राज्यसभा में कृषि बिल का मुखर होकर विरोध करने वाली तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर ने इस मामले को लेकर कहा कि ‘इस मामले को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के कई सदस्यों के विचार को नहीं माना गया और तथाकथित ध्वनि मत के जरिए इसे पास कर दिया गया.

इस मामले में अध्यक्ष की भूमिका पूर्ववर्ती ‘पक्षपातपूर्ण’, अभूतपूर्व और गैरकानूनी थी.

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