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रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, जानिए क्यों मजबूत हो रहा है डॉलर

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केंद्र की मोदी सरकार के नाम आज एक नया रिकॉर्ड बन गया जब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 80.05 पर आ गया. जिसे देखकर ऐसा लगता है कि भारतीय मुद्रा रुपया अपने कठिन दौर से गुजर रही है. पिछले कुछ समय से रुपये की कीमत में तेजी से गिरावट आ रही है. रुपया लगातार एक के बाद एक नए निचले स्तर पर जा रहा है. रिजर्व बैंक के मौजूदा प्रयासों के बावजूद रुपये में गिरावट जारी है.

इंटरबैंक फॉरेक्स एक्सचेंज कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया शुरू में 80 से नीचे खुला था. पिछले हफ्ते डॉलर इंडेक्स बढ़कर 109.2 हो गया था, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे ज्यादा है. आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अब तक रुपया करीब 7 फीसदी कमजोर हुआ है.

8 साल में 25 फीसदी गिरा रुपया
डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत लगातार गिर रही है. प्रमुख मुद्राओं पर नजर डालें तो डॉलर के लगातार मजबूत होने से रुपया कमजोर होता जाता है. लगभग दो दशकों के बाद डॉलर और यूरो का मूल्य बराबर हो गया है. जबकि यूरो लगातार डॉलर के ऊपर बना हुआ है. भारतीय रुपये की बात करें तो दिसंबर 2014 से डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है. एक साल पहले डॉलर के मुकाबले रुपया 74.54 पर था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि रुपये में मौजूदा गिरावट की वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रूस और यूक्रेन के बीच महीने भर से चली आ रही जंग है. वित्त मंत्री का यह सरकारी जवाब लोगों को हजम नहीं हो रहा है.

बदलते हालात ने पूरी दुनिया में मंदी का खतरा पैदा कर दिया है. अमेरिका में महंगाई 41 साल के उच्चतम स्तर पर है. इसे रोकने के लिए फेडरल रिजर्व तेजी से ब्याज दरें बढ़ा रहा है. महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद अमेरिका में अचानक से ब्याज दरों में एक फीसदी की बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है. अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरों से डॉलर को फायदा हो रहा है. मंदी की आशंका विदेशी निवेशकों को उभरते बाजारों से बाहर निकालकर डॉलर में सुरक्षित निवेश के रूप में ले जा रही है. जिससे डॉलर में अप्रत्याशित रूप से मजबूती आई है. इसके चलते दशकों में पहली बार डॉलर और यूरो की कीमतें लगभग बराबर हो गई हैं.

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