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बुलेट ट्रेन को लेकर नहीं हो रहा रास्ता साफ, गुजरात में विरोध के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने समीक्षा का दिया आदेश

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक बुलेट ट्रेन के लिए गुजरात में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान, आदिवासी मोर्चा खोल विवाद खड़ा कर रहे हैं. जिसकी वजह से ये मामला गुजरात हाईकोर्ट में पहुंच चुका है. ऐसे में अब महाराष्ट्र सरकार ने भी मुंबई- अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन समेत राज्य में चल रही दूसरी विकास परियोजनाओं की समीक्षा का आदेश दिया है.

इस सिलसिले में सीएम ने रविवार को बताया था कि उन्होंने बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट की समीक्षा के आदेश दिए हैं. बुलेट ट्रेन परियोजना को किसानों और आदिवासियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, जिनकी भूमि अधिग्रहीत की जानी है. उन्होंने कहा, ‘यह सरकार आम आदमी की है. जैसा कि आपने अभी पूछा, हां, हम बुलेट ट्रेन (परियोजना) की समीक्षा करेंगे. क्या मैंने आरे कार शेड की तरह बुलेट ट्रेन परियोजना को रोका है? नहीं।’

2017 में हुआ था शिलान्यास

बता दें कि सितंबर 2017 में अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम शिंजो अबो ने भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रॉजेक्ट का शिलान्यास किया था. पीएम मोदी के इस ड्रीम प्रॉजेक्ट के 2023 तक पूरा होने की संभावना थी. इस प्रॉजेक्ट का ट्रैक लेंथ करीब 508 किलोमीटर था, जो मुंबई के बीकेसी से गुजरात के साबरमती तक रखा गया था. इस बारे में जून में रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये है. इसमें से 81 प्रतिशत लागत का वित्त पोषण जापान इंटरनैशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जीका) के माध्यम से किया जाएगा.

प्रतिशोध की राजनीति नहीं

यह घोषणाएं तब की गई हैं जब एक दिन पहले शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस की ठाकरे के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र विकास आघाड़ी (एमवीए) ने 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 169 विधायकों के समर्थन से विश्वास मत जीत लिया। ठाकरे ने कहा कि राज्य में पूर्ववर्ती बीजेपी नीत सरकार की जो प्राथमिकताएं थीं, उन्हें ‘हटाया’ नहीं गया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रतिशोध की राजनीति नहीं है।