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BJP के बाद TMC ने लिखा मार्क जुकरबर्ग को खत, भाजपा के प्रति झुकाव का आरोप

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  • गहराता जा रहा है फेसबुक को लेकर राजनीतिक विवाद
  • भाजपा के बाद टीएम से ने लिखा फेसबुक के सीओ को खत
  • भाजपा के प्रति झुकाव का लगाया आरोप

फेसबुक को लेकर देश में राजनीतिक विवाद गहराता ही जा रहा है. अभी कल केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को एक पत्र लिखकर अपनी नाराजगी का इजहार किया था.

वहीं अब तृणमूल कांग्रेस ने भी जुकरबर्ग को खत लिखकर बीजेपी के प्रति झुकाव रखने का आरोप लगाया है.

तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि इस आरोप का उसके पास कई सबूत भी मौजूद हैं.

खत लिखकर फेसबुक पर लगाया गंभीर आरोप

मिल रही जानकारी के अनुसार टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने मार्क जकरबर्ग 28 अगस्त को यह खत लिखा था. इस खत में उन्होंने पहले की मुलाकात का भी जिक्र किया है.

जिसमें कुछ मामलों को उठाया गया था. उन्होंने अपने इस खत में 2014 और 2019 में पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले आपकी कंपनी ने बंगाल में फेसबुक पेज और अकाउंट्स को ब्लॉक कर कर दिया था.

जो भाजपा के बीच संबंध की ओर इशारा करते हैं. इतना ही नहीं उन्होंने दावा किया कि फेसबुक किस तरीके से भाजपा के प्रति झुकाव रखता है उसका हमारे साथ कई सबूत भी है.

यह भी पढ़ें: रविशंकर प्रसाद का जुकरबर्ग को पत्र, ‘फेसबुक के कर्मचारी पीएम मोदी के प्रति अपशब्द कहते हैं’

इससे पहले भाजपा ने खत लिखकर लगाया था आरोप

गौरतलब है कि इससे पहले रविशंकर प्रसाद ने जुकरबर्ग को खत लिखकर दावा दिया था कि फेसबुक इंडिया टीम में कई वरिष्ठ अधिकारी एक विशेष राजनीतिक विचारधारा क समर्थक हैं.

फेसबुक के कर्मचारी पीएम मोदी और वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के प्रति अपशब्द कहते हैं.

कांग्रेस भी उठा चुका है सवाल

इससे पहले कांग्रेस ने बीजेपी और फेसबुक के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया था.

कांग्रेस ने अमेरिका के एक अखबार की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था बीजेपी एवं फेसबुक के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा था विदेशी सोशल नेटवर्किंग कंपनी का कृत्य ‘डिजिटल साम्राज्यवाद’है.

राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा था‘‘अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भारत के लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव पर फेसबुक एवं व्हाट्सऐप के खुलेआम हमले को बेनकाब कर दिया है.’’

उन्होंने कहा था कि किसी भी विदेशी कंपनी को हमारे आंतरिक मामले में दखल देने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

मामले की तत्काल जांच होनी चाहिए और मामले में लिप्त होने वाले लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

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