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टोक्यो ओलंपिक एक साल के लिए टले, जापान ने कहा- कोरोना खत्म होने के बाद गेम्स के बारे में सोचेंगे

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कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते 2020 टोक्यो ओलंपिक एक साल के लिए टाल दिया गया है. जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक संघ (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमक बाक के बीच मंगलवार को हुई बातचीत के बाद गेम्स को टालने पर फैसला लिया गया. अब यह खेल 2021 की गर्मियों में होंगे.

मालूम हो कि विश्व में फैले कोरोना महामारी की वजह से लगातार जापान में होने वाले विश्व खेलों के महाकुंभ को टालने की बात चल रही थी. पूर्व कार्यक्रम के मुताबित 2020 ओलंपिक गेम्स इस साल 24 जुलाई से नौ अगस्त के बीच होने थे.

जापान और आईओसी पिछले कुछ महीने से लगातार कह रहे थे कि गेम्स तय कार्यक्रम के मुताबिक 24 जुलाई से शुरू होंगे. लेकिन कोविड-19 के बढ़ते खतरे के साथ जापान और आईओसी पर इन खेलों को स्थगित करने का दबाव बढ़ने लगा था. प्रधानमंत्री आबे के घऱ पर मंगलवार को कैबिनेट की अहम बैठक हुई. इसके बाद ओलंपिक मंत्री साइको हाशिमोतो ने कहा- टोक्यो ओलिंपिक तभी हो सकते हैं, जब कोरोना वायरस खत्म होगा.

कनाडा ने एक साल खेल टालने की मांग की थी

कनाडा और ऑस्ट्रेलिया पहले ही ओलिंपिक में हिस्सेदारी से इनकार कर चुके हैं. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने इन खेलों से हटते हुए कहा था कि अगर टोक्यो ओलंपिक अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 24 जुलाई से 9 अगस्त के बीच होते हैं तो वे अपने खिलाड़ी गेम्स में नहीं भेजेंगे. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने तो यहां तक कहा है कि अगर इन खेलों को 2021 तक स्थगित नहीं किया जाता, तो वे इसमें हिस्सा नहीं लेंगे.

आर्थिक नुकसान कितना?

सीएनबीसी के मुताबिक, 2016 से अब तक आईओसी ने टोक्यो ओलंपिक 2020 के लिए 5.7 अरब डॉलर (40 हजार 470 करोड़ रुपए) रेवेन्यू जुटाया. इसका 73 फीसदी हिस्सा मीडिया राइट्स से आया. बाकी 27 फीसदी प्रायोजकों से मिला. ओलंपिक रद्द होने की स्थिति में आईओसी को यह रकम लौटानी होगी. इतना ही नहीं आईओसी दुनियाभर में एथलीट्स के लिए स्कॉलरशिप, एजुकेशन प्रोग्राम्स के साथ ही फेडरेशन्स से जो फंड जुटाता है, वो भी उसे लौटानी होगी. लिहाजा, खेल टाले गए हैं. इन्हें रद्द नहीं किया गया है.

टोक्यो ओलंपिक 2020 की मेजबानी जापान के पास है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वह तैयारियों पर अब तक 12.6 अरब डॉलर खर्च कर चुका है. कुल अनुमानित खर्च इसका दो गुना यानी करीब 25 अरब डॉलर है.

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