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“जानवर समझो, इलाज दो”- फौज के हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट में दबी डॉक्टरों की हृदय विदारक चीख

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दीपक मसला, अहमदाबाद: कोरोना के कर्मवीरों को आज सरहद के शूरवीरों ने सलामी दी. सेना के तीनों अंगों के जवान कोरोना को शिकस्त देने में जुड़े हजारों डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मी और दूसरे फ्रंटलाइन योद्धाओं के प्रति आभार प्रकट करते हुए उन पर पुष्प वर्षा की. लेकिन इस सम्मान के गुलाबी बादलों के पीछे इन डॉक्टरों के हृदय विदारक चीख छुपी हुई है. जब पूरा देश डॉक्टरों के सम्मान की खबर देख रहा था, तब कोरोना परीक्षण के बाद इलाज के लिए गए डॉक्टरों के एक समूह अपना दर्द व्हाट्स ग्रूप में चर्चा कर रहा था. जिसमें डॉक्टर ने अधिकारियों को लिखा, “आप हमें जानवर समझो लेकिन ध्यान तो लो”

गुजरात कैंसर अनुसंधान संस्थान के 17 डॉक्टर कोरोना के चपेट में आने की खबर आने के बाद, जब ये डॉक्टर इलाज के लिए गए तो ऐसे कर्मवीरों को तत्काल इलाज देने के बजाय उन्हें बाहर खड़ा रखा गया. इतना ही नहीं डॉक्टरों को इलाज के लिए बेड भी नहीं मिला. सोशल मीडिया में वायरल होने वाले इस ग्रूप में रेजिडेंट डॉक्टर लिखते हैं “आपने बताया कि हमें कोई खतरा नहीं था, हम काम करते रहे. नर्स को कोरोना हुआ तो कहा गया कि क्वारेंटाइन और परीक्षण की जरूरत नहीं है. हमने माना कि डॉक्टर संक्रमित हुए 11 डॉक्टर और 4 अन्य रेजिडेंट डॉक्टर कोरोना संक्रमित हुए लेकिन आप उन्हें बेड आवंटित नहीं कर सके. हमने आपको बताया लेकिन आपने कुछ नहीं किया. भले आप हमें जानवर समझो लेकिन ध्यान तो लो हम लोगों की“.

डॉक्टरों ने अपने दर्द बयां किया हालांकि दोपहर बाद कोरोना संक्रमित होने वाले डॉक्टरों रात 11.30 बजे बेड की व्यवस्था की गई और लगभग 12 बजे इनका उपचार शुरू हुआ. ऐसे में सवाल ये उठता है कि अपनी जान को जोखिम में डालकर लोगों की जिंदगियां बचाने वाले इन डॉक्टरों को जब से संक्रमण संक्रमित करता है तो फिर इनके साथ जानवरों जैसा सलूक क्यों किया जा रहा है.

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