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कछुआ से सुस्त गुजरात सरकार: अहमदाबाद मेट्रो 10 साल में 10 किमी. भी नहीं चल सकी

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मुजाहिद तुंवर, अहमदाबाद: जन उपयोगी योजनाओं को जनहित में शुरु किया जाता है. ऐसी योजना समयसीमा में पूरी हो जाती है. लेकिन अगर सरकार चुनावी योजनाओं की तरह जन उपयोगी योजना को शुरु करे तो योजना के कामयाबी पर सवाल खड़ा होना लाजमी हो जाता है. गुजरात को जहां एक तरफ देश के विकास का मॉडल बताया जा रहा है वहीं अहमदाबाद में दस साल पहले शुरु होने वाली मेट्रो रेल परियोजना सरकार के विकास के झूठे दावे की पोल खोल रही है.

आज से पूरे दस साल पहले यानी 4 फरवरी, 2010 में शुरू की गई मेट्रो परियोजना (Metro Link Express for Gandhinagar and Ahmedabad (MEGA) Company Ltd) ठीक दस साल पहले शुरु हुई थी लेकिन आज दस साल पूरा होने के बावजूद दस किलोमीटर तक का सफर पूरा करने में कामयाब नहीं हो पाई. पिछले दस साल से चलने वाली मेट्रो परियोजना फिलहाल वस्त्राल से एपरेल पार्क यानी 6 किलो मीटर तक की दूरी में दौड़ रही है, इस परियोजना को खत्म होने में अभी कितना वक्त लगेगा इसके बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. अहमदाबाद की लगभग तमाम मुख्य सड़कों पर मेट्रो परियोजना के नाम पर खुदाई कर रास्तों को गढ्ढा बना दिया गया है. लेकिन मेट्रो का निर्माण कार्य कछुआ से कम गति से चल रहा है.

देश को विकास का आईना दिखाने वाले गुजरात में कछुआ के रफ्तार से भी कम स्पीड से चलने वाले मेट्रो परियोजना को लेकर बड़ी-बड़ी बात सिर्फ शाब्दिक व्याभिचार बनकर रह जाता है. 2020 के नवंबर- दिसंबर में अहमदाबाद महानगर पालिका का चुनाव होने की उम्मीद जताई जा रही है. चुनाव को मद्देनजर अहमदाबाद की तमाम सड़कों पर मरम्मत काम शुरू कर दिया गया है, और लगभग हर राजमार्ग को तोड़ दिया गया है. शहर में ऐसी कोई सड़क नहीं बची है, जहां टूटी सड़कों की वजह से जनता को भारी ट्रैफिक का सामना ना करना पड़ रहा हो. ऐसी स्थिति में आने वाला मानसून सीजन अहमदाबादियों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

जब विश्व गुरु बनने की बात की जा रही हो, तब कार्य शक्ति और कार्य क्षमता को बढ़ाकर इसका सबूत देना पड़ता है. जब भी भारत की बात की जाती है तो उसकी तुलना चीन से की जाती है. लेकिन काम की तुलना पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ कर जनता को खुश कर दिया जाता है. चीन अपने नागरिकों के इलाज के लिए 10 दिनों में हज़ार बेड का अस्पताल तैयार कर लेता है. वहीं अहमदाबाद में 10 सालों में 10 किलोमीटर का भी मेट्रो चल नही सका. ये अपने आपमें गुजरात सरकार के गाल पर थप्पड़ के समान है जो विकास का मोडल पेश करने का दावा पूरे देश में करती फिर रही है.