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श्रेय अस्पताल से 41 मरीजों को बचाने वाले दो पुलिसवालों में कोरोना के लक्षण

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श्रेय अस्पताल आग मामला

  • गुरुवार को लगी थी आग
  • 8 कोरोना मरीजों की मौत
  • 41 मरीजों को बचाया गया
  • दो पुलिसवालों को बुखार और खांसी
  • क्वारेंटाइन में हैं 8 पुलिसवाले
  • अस्पताल के पास नहीं था फायर एनओसी

श्रेय अस्पताल के आईसीयू में लगी आग से 41 कोरोना मरीजों को बचाने वाले नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन के दो पुलिसवालों में कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई दिए हैं.
खबरों के मुताबिक, दोनों पुलिसवालों में बुखार और खांसी जैसे कोरोना के लक्षण दिखाई दिए हैं.
श्रेय अस्पताल के चौथे महाले पर मौजूद आईसीयू में जब आग लगी तो पुलिस आनन-फानन में कोरोन मरीजों को बचाने के लिए पहुंची और जल्दबाजी के कारण वे पीपीई किट नहीं पहन पाए.

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वहां से आने के बाद पुलिसवालों को क्वारंटाइन में रखा गया है.
अब खबर है कि इनमें से दो पुलिसवालों में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए हैं.

क्वारंटाइन में हैं आठ पुलिसवाले

नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन की पुलिस टीम के आठ सदस्यों को क्वारंटाइन में रखा गया है.
वहीं प्रशासन ने उन सभी कर्मचारियों के लिए कोरोना टेस्ट कराने का फैसला किया है जो बचाव कार्य में शामिल थे.
जिन मरीजों को श्रेय अस्पताल में आग से बचाया गया था, उन्हें उपचार के लिए एसवीपी अस्पताल ले जाया गया है.

कैसे बचाव कार्य को दिया गया अंजाम?

गुरुवार को श्रेय अस्पताल में आग करीब सुबह 3 बजे लगी थी.
आग की सूचना मिलने पर नवरंगपुरा पुलिस भी मौके पर पहुंची.
पुलिसवालों ने अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना, एक महिला अधिकारी के नेतृत्व में 41 लोगों को बचाया.
उस समय पुलिसवालों को भी पता था कि वे कोरोना मरीजों का बचाव कर रहे हैं.
क्योंकि श्रेय अस्पताल कोरोना रोगियों के लिए तय किया गया था.

अगर वे पीपीई किट का इंतजार करते तो इससे समय का नुकसान होता और ज्यादा मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती थी. लिहाजा, पुलिसवाले बिना किसी बात की परवाह किए कोरोना मरीजों का बचाव करने पहुंचे.
इसके बाद बचाए गए मरीजों को एसवीपी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया.

श्रेय हॉस्पिटल के पास नहीं थी फायर एनओसी

जांच में पता चला है कि श्रेय अस्पताल के पास अनिवार्य फायर एनओसी नहीं थी.
उसकी फायर एनओसी कुछ महीने पहले समाप्त हो गई थी लेकिन अस्पताल ने उसको रीन्यू करने की जहमत नहीं उठाई गई.
यह भी सामने आया है कि अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम ठीक नहीं था.
यहां तक पता चला है कि अस्पताल में कुछ आग बुझाने वाले कुछ ही उपकरण मौजूद थे.
मालूम हो कि आग लगने से आठ कोरोना मरीजों की मौत हो गई थी जिसको लेकर अभी जांच चल रही है.

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