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नित्यानंद कुकर्म: कौन है बाबा की शागिर्द रश्मि शाह, मंजुला और अमिताभ शाह की क्या है भूमिका?

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अहमदाबाद: डीपीएस ईस्ट से दो लड़कियों के गायब होते ही बलात्कारी बाबा नित्यानंद के द्वारा गुजरात में चल रहे कुकर्म के पर्दाफाश होने का आगाज हुआ. लेकिन नित्यानंद किन लोगों के साथ मिलकर गुजरात में ह्युमन ट्राफिकिंग, हवाला, ब्लैक मेलिंग और काला-सफेद का धंधा करता था वह प्रश्न पुलिस और सरकार की जांच से गायब नजर आ रहा है, धर्म-धंधा के खेल में सरकार के तरफ से जमीन के NA को लेकर दस्तावेजी धोखाधड़ी का मामला हो इस तरीके से माहौल तैयार किया जा रहा है. ऐसे में सवाल ये उठता कि, वो कौन लोग हैं जो नित्यानंद के कुकर्मों को ढकने की कोशिश कर रहे हैं?

गुजरात एक्सक्लूसिव को मिलने वाली जानकारी के अनुसार, सरकार नित्यानंद के मामले को दस्तावेजों के साथ धोखाधड़ी जैसे सामान्य मामले में निपटाने की कोशिश कर रही है. क्योंकि नित्यानंद के इस कुकर्म में आला सरकारी अधिकारी और मंत्रियों से लेकर व्यापक पैमाने पर व्यापारी और तथाकथित धर्म गुरु शामिल हैं. इन लोगों को नित्यानंद शाम-दाम-दंड-भेद की नीति से चला रहा है. अगर नित्यानंद पर कानूनी शिकंजा कसा जाता है तो सचिवालय में बैठे सचिवों से लेकर शहर के हाईराइज बिल्डिंगों में बैठे अभिजात्य वर्ग को परेशानी होगी. इतना ही नहीं सरकार को भी इससे कुछ हद तक नुकसान होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसीलिए सरकार नित्यानंद के कुकर्मों के मामले को हल्के में खत्म करने की कोशिश कर रही है. गुजरात एक्सक्लूसिव को गुजरात में स्थापित नित्यानंद के नेटवर्क की विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई है जिसे विस्तार से प्रकाशित किया जा रहा है.

कैसे हुआ गुजरात में नित्यानंद का पदार्पण?

रश्मि शाह:
श्वेता सिंह चौधरी नामक लड़की जिसे अब रश्मि शाह के नाम से जाना जाता है, उसकी शादी अहमदाबाद स्थित अमिताभ अमित शाह के साथ हुई. रश्मि शाह का नित्यानंद से गहरा रिश्ता है. नित्यानंद और रश्मि शाह के बीच का रिश्ता इतना गहरा है कि वह बाबा नित्यानंद के साथ 31-31 दिनों तक रहती है. रश्मि शाह ने ही अपने पति अमिताभ शाह की पहचान नित्यानंद के साथ करवाई थी. पहले से ही चालाक अमिताभ शाह को नित्यानंद के शरण में जाने पर फायदा दिखता है. इसीलिए वह अपनी पत्नी रश्मि शाह को बलात्कारी बाबा नित्यानंद से दूर करने के बजाय खुद उसकी गोद में बैठ जाता है.

रश्मि शाह फिलहाल कौन सी जिम्मेदारी कर रही है अदा?

रश्मि शाह नित्यानंद के लिए गुजरात में अपने पति अमिताभ शाह और मंजुला पूजा श्रॉफ की मोनिटरिंग के साथ गुजरात, दिल्ली, यूएसए, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित देशों में नित्यानंद के लिए नेटवर्किंग और धंधा के व्याप के लिए स्ट्रेटेजी मेकिंग का काम करती है.

अमिताभ शाह:
अमिताभ शाह अपनी पत्नी रश्मि शाह के माध्यम से नित्यानंद से मिलता है. उसे कुकर्मी बाबा के चरणों में पैसा, पहुंच और ताकत दिखता है, इसलिए वह अपनी पत्नी रश्मि को नित्यानंद से दूर करने बजाय उसकी गोद में बैठ जाता है. वह नित्यानंद को दिखाने की कोशिश करता है कि वह बड़े पैमाने पर काम कर सकता है. विदेश से शिक्षा हासिल करने वाले अमिताभ शाह को अपने साथ जोड़ने में नित्यानंद को भी फायदा दिखता है. जिसके बाद नित्यानंद अमिताभ शाह को साथ रहकर गुजरात के कारोबार की जिम्मेदारी उसी के हाथों में सौंप देता है.

नित्यानंद को गुजरात में अपना पैर फैलाने के लिए बड़े व्यापारी, नेता और अधिकारियों की आवश्यकता होती है. इसके लिए अमिताभ शाह बड़े ही चालाकी से एक एनजीओ के माध्यम से कॉर्पोरेट, नेता और अधिकारियों को जोड़ने का काम करता है. एक बार ये लोग अमिताभ शाह के एनजीओ से जुड़ जाते हैं, फिर धीरे-धीरे अमिताभ शाह इन लोगों को नित्यानंद तक पहुंचा देता है. इस पूरे खेल में अमिताभ शाह का एनजीओ “युवा अनस्टॉपेबल” बड़ी अहम भूमिका अदा करता है. इस खेल में पर्दे के पीछे खेलने वाली रश्मि शाह भी अमिताभ के साथ अहम भूमिका निभाती है.

अमिताभ शाह की दिन दूनी-रात चौगुनी तरक्की देख शाह के साथ पहले से ही जुड़ी मंजुला श्रॉफ भी इस खेल में शामिल हो जाती है. जिसके बाद नित्यानंद को गुजरात में मंजुला श्रॉफ जैसी एक और मजबूत खिलाड़ी मिल जाती है.

अमिताभ शाह कौन सी जिम्मेदारी को कर रहा है अदा?

अमिताभ शाह गुजरात में नित्यानंद के लिए कॉरपोरेट नेटवर्किंग, नये कॉर्पोरेटर को नित्यानंद के लिए जाल में फसाना, एनजीओ की चैनल चलाकर गुजरात में नित्यानंद और उनके सहयोगियों के पैसे का प्रबंधन और नित्यानंद के लिए ब्रांड बिल्डिंग एंव इमेज बिल्डिंग के लिए काम करता है. इतना ही नहीं नित्यानंद के हवाला और ह्युमन ट्राफिकिंग में अमिताभ का अहम किरदार धीरे-धीरे सामने आ रहा है.

मंजुला श्रॉफ:
मंजुला श्रॉफ को शहर में तीन चीजों के लिए जाना जाता है, एक, उसका ग्लैमरस अंदाज, दूजा सफल बिजनेस वुमन और तीसरा, संत्री से लेकर मंत्रियों तक को पानी में बैठा देने की फितरत. मंजुला श्रॉफ की ये तीनों विशेषताएं नित्यानंद के लिए बहुत उपयोगी साबित हुई, और दुनिया को प्रभावित करने वाला नित्यानंद मंजुला श्रॉफ से प्रभावित होकर अपने विज़न प्रोजेक्ट “कैलाशा” में शामिल कर लिया. मंजुला श्रॉफ नित्यानंद के लिए अपनी संस्था डीपीएस और फाइव स्टार होटलों से लेकर मंत्रालय तक की अपनी नेटवर्किंग का इस्तेमाल नित्यानंद के लिए करती है.

मंजुला श्रॉफ डीपीएस सहित विभिन्न शैक्षणिक परिसरों में शिक्षा हासिल करने वाले बच्चों के माध्यम से धनी माता-पिता, नौकरशाह अभिभावक और राजनेताओं को नित्यानंद के साथ जोड़ती है. इतना ही नहीं, मंजुला अपने नेटवर्किंग से फाइव स्टार दोस्त ,निगम से लेकर सचिवालय में बैठे आला अधिकारियों और राजनेताओं को अपनी ताकत से नित्यानंद के शरण में लाने के लिए मजबूती से काम करती है.
मंजुला के उन दिनों के दौरान किए गए कार्य आज नित्यानंद के लिए फलदायी साबित हो रहे हैं. नित्यानंद के धर्म, धंधा, युवती, हवाला, ब्लैक मेलिंग, काला-सफेद और ह्युमन ट्राफिकिंग जैसे संगीन मामले को सरकार और जांच अधिकारी डीपीएस स्कूल की सामान्य जमीनी विवाद के नाम पर खत्म करने की कोशिश कर रहे है.

मंजुला श्रॉफ कौन सी जिम्मेदारी को कर रहा है अदा?
मंजुला श्रॉफ अपने शैक्षणिक परिसरों का उपयोग कर नित्यानंद के लिए धनी अभिभावकों, उच्च सरकारी अधिकारी जिनके बच्चे मंजुला के शैक्षणिक संस्थाओं में पढ़ते हैं. अपने बच्चों को मंजुला के शैक्षणिक संस्थाओं में भेजने वाले और डीपीएस स्कूल के साथ ही साथ अन्य स्कूलों में एडमिशन के लिए फोन करने वाले उच्च सफेदपोश वर्ग को नित्यानंद के साथ जोड़ने का काम करती है. इतना ही नहीं उसकी एक और अहम भूमिका है सरकार के संत्रियों से लेकर मंत्रियों और सचिवों को नित्यानंद के नेटवर्क में लाने का काम! इस काम को अंजाम देने के लिए मंजुला शाम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल करती है.

नित्यानंद के लिए कैसे व्यवसायी, अधिकारी और राजनेता उपयोगी साबित हो रहे हैं?

सुरा और सुंदरी के शौकीन नित्यानंद के सेक्स सीडी कांड में फंसने के बाद महत्वाकांक्षी नित्यानंद को यह समझ आ गया कि धर्म का व्यापार करना और उसके साथ मज़े करना आसान नहीं. अगर उसे धर्म के साथ मौज-मस्ती करना है तो उसे ताकत, रसूख और पैसों की जरुरत पड़ेगी. इसी के मद्देनजर नित्यानंद ने एक विजन प्रोजेक्ट “कैलाशा” पर काम शुरू किया.

नित्यानंद फिलहाल भारत से फरार हो गया है और अपना देश “कैलाशा” को विकसित कर रहा है. “कैलाश” को नित्यानंद ने एक दिन में विकसित नहीं किया बल्कि नित्यानंद 2011-12 से “कैलाशा” पर काम कर रहा था. इस दौरान उसे पैसा,रसूख और पावर की जरुरत थी.

“कैलाशा” परियोजना के लिए नित्यानंद ने अमीर वर्ग, सरकारी उच्च अधिकारियों और राजनेताओं को जोड़ने का काम शुरू किया. नित्यानंद अमीर वर्ग से जुड़े लोगों का काम उच्च अधिकारियों और राजनेताओं से करवाता था. उच्च अधिकारियों का काम राजनेताओं से करवाता था. राजनेताओं को उनके जरुरत के मुताबिक सेवा सहयोग धनाढ्य वर्ग और अधिकारियों को साध कर करवाता है. साथ ही साथ मंजुला श्रॉफ जैसी ग्लेमर की दुनिया और अमिताभ शाह जैसे एनजीओ और हवालाबाजों के माध्यम से सहयोग प्रदान करता है.

यदि सरकार डीपीएस आश्रम मामले को सामान्य जमीन का मामला बनाकर ना निपटाना चाहे, तो इस मामले में जमीन विवाद से हटकर गहराई से जांच करवानी चाहिए, ताकि पता चले कि, नित्यानंद ने गुजरात में कितने लोगों को ब्लैकमेल किया है? कितने लोगों के लिए हवाला किया है? कितनी जमीन पर कब्जा किया है? नित्यानंद और उसके साथियों ने कितने लोगों की नंगी तस्वीरें और वीडियो को अपनी दराजों में कैद कर रखा है? देश-विदेश की कितनी युवतियां बलात्कारी नित्यानंद के जाल में फंसी हुई हैं? यदि उच्च स्तर पर जांच की जाए तो ये सभी बातें सामने आ सकती हैं, लेकिन पूर्व में “सीडीओं”के रिकॉर्ड को देखते हुए ऐसा लगता नहीं कि सरकार बड़े पैमाने पर मामले की जांच करवाएगी.