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राम विलास पासवान की मांग, हाईकोर्ट में अंग्रेजी के साथ मातृभाषा में भी हो कामकाज

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भारतीय जनता पार्टी की सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि देश के हाईकोर्ट में अंग्रेजी के अलावा मातृभाषा में कामकाज होना चाहिए. पासवान ने कहा कि इस सिलसिले में उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री से हुई है और उन्होंने उनसे अदालतों में मातृभाषा को गांधी जी की 150वीं जयंती पर लागू करने को कहा है.

अभी नहीं तो कभी नहीं

केंद्रीय मंत्री रामविलास ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, हमने प्रधानमंत्री से कहा है कि अगर आपके समय में यह नहीं होगा तो फिर कभी नहीं होगा. तमिलनाडु की हाईकोर्ट में तमिल में सुनवाई होनी चाहिए. इसी तरह कर्नाटक, गुजरात, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों में भी ऊंची अदालतों की भाषा वहां की मातृभाषा होनी चाहिए. उन्होंने कहा, जब तक इस देश में इंडियन जूडिशियल सर्विस नहीं होगा तब तक संसद से कानून पास होता रहेगा और और कोर्ट में लटकता रहेगा. उत्तराखंड में प्रमोशन में आरक्षण के विवादास्पद मुद्दे पर पासवान ने पहली बार महत्वपूर्ण बात करते हुए कहा कि गलती केवल कांग्रेस की नहीं है बल्कि उत्तराखंड की दोनों सरकारों की है.

पासवान ने कहा, यह 2010 का मामला है, लेकिन इस फाइल को दबाकर रखा गया. यह अलग बात है कि एनडीए की सरकार बनने के बाद भी इसकी जानकारी केंद्र सरकार को नहीं दी गई. किसी भी पार्टी की सरकार हो, अगर वह आरक्षण के खिलाफ कोर्ट में बहस करती है तो वह आरक्षण विरोधी है. बिहार के कद्दावर नेता पासवान ने कहा कि हाल ही में उन्होंने तकरीबन 100 सांसदों के साथ बैठक की है जिसमें एकमत से बात आई कि प्रमोशन के मामले में संविधान की नौवीं अनुसूची में डाल दिया जाए जिससे ऐसे मामले अदालत में न अटकें.

तैयारी के साथ आते हैं पीएम मोदी

पासवान ने कहा, मैंने छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है और दावे के साथ कह सकता हूं कि नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में सबको अपनी बात कहने की छूट होती है, यहां तक कि प्रधानमंत्री खुद कहते हैं कि मैं आपलोगों के सामने देश का नक्शा रख रहा हूं आप अपनी प्रतिक्रिया दें. कैबिनेट की बैठक पांच-पांच, सात-सात घंटे तक चलती है. उन्होंने कहा कि ये अलग बात है कि कैबिनेट की हर बैठक में हर एजेंडे पर नरेंद्र मोदी इतनी तैयारी करके आते हैं कि किसी मंत्री के लिए बहस करना मुश्किल होता है.

वन नेशन, वन राशन कार्ड पर पुनर्विचार करें केजरीवाल

केंद्रीय उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पासवान ने दिल्ली में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल को भी कुछ नसीहतें दीं. उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि वन नेशन वन राशन कार्ड पर वह पुनर्विचार करें क्योंकि मोदी की इस महायोजना से सबसे ज्यादा लाभ उन गरीबों को मिलने वाला है जो बाहर जाकर मेहनत मजदूरी करते हैं.