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चिंताजनक: गुजरात में जंगल का राजा शेर भी नहीं सुरक्षित, 2 वर्षों में 261 की मौत

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गांधीनगर: गुजरात के गौरव कहे जाने वाले गीर के जंगल में शेरों की मौत का सिलसिला बढ़ता जा रहा है. 2018 में 59 शेर मारे गए, 2019 में बढ़कर ये आकड़ा 79 हो गया शेरों के मरने का आकड़ा 2018 में 54 मरने का आकड़ा सामने आया है. इस तरह देखा जाए तो पिछले दो सालों में गुजरात के विभिन्न हिस्सों में 261 शेरों व शावकों की मौत हुई.

गुजरात विधानसभा में बजट सत्र के दौरान प्रशनकाल के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए वन मंत्री गणपत वसावा ने लिखित में उत्तर देते हुए बताया कि पिछले दो सालों में गुजरात के विभिन्न हिस्सों में 261 शेरों व शावकों की मौत हुई. सरकार ने बताया कि इनमें से 11 शेर और छह शावकों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई. उन्होंने बताया कि 2018 और 2019 में कुल 138 शेरों और 123 शावकों की मौत हुई. इसके अलावा राज्य में पिछले दो साल में 250 तेंदुए और उनके 90 शावकों की मौत हुई जिनमें से 79 तेंदुओं और 16 शावकों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई.

सदन को जानकारी देते हुए वसावा ने बताया कि पिछले दो वर्षों में तेंदुए के हमलों में वृद्धि हुई है. पिछले दो वर्षों में अमरेली और गीर सोमनाथ जिले में 104 घटनाएं सामने आए है. जिसमें 16 लोगों की मौत गई जबकि 88 घायल हुए. उन्होंने कहा कि शेरों की अप्राकृतिक मौतें रोकने के लिए उठाए गए कई कदमों की जानकारी भी दी. शेरों के उपचार के लिए सासन गिर में एक अत्याधुनिक अस्पताल बनाया जाने की जानकारी भी उन्होंने दी.