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अलगाववादी नेता यासीन मलिक को टेरर फंडिंग केस में उम्रकैद की सजा

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अलगाववादी नेता यासीन मलिक को दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने टेरर फंडिंग के दो अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही मलिक पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

इससे पहले एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 19 मई को यासीन मलिक को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपों में दोषी ठहराया था. यासीन मलिक को कुल 8 मामलों में सजा सुनाई गई है. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. एनआईए ने कोर्ट से यासीन मलिक को फांसी देने की मांग की थी.

कोर्ट का फैसला सामने आने के बाद एडवोकेट उमेश शर्मा ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि इनको 2 उम्रकैद की सज़ा सुनाई है और 10-10 साल की 5 सजाएं हैं. कोर्ट ने जुमार्ना भी लगाया है अगर जुमार्ना नहीं देते हैं तो उसके बदले सज़ा मिलेगी. यह हाईकोर्ट में सिर्फ सज़ा के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं, निर्णय के ख़िलाफ़ नहीं.

यासीन मलिक द्वारा आतंकी हमले का शिकार हुए भारतीय वायुसेना अधिकारी रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना ने कोर्ट के फैसले को लेकर कहा कि जजों ने अपने विवेक से जो भी सज़ा सुनाई है मैं उसका स्वागत करती हूं. वे लोग मुझसे ज़्यादा अच्छे से जानते हैं कि इस मामले में कौन सी सज़ा देनी चाहिए.

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