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यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर ने कहा- मैं देश में ही हूं लेकिन आरबीआई के फैसले पर कुछ भी नहीं कह सकता

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यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर ने शुक्रवार को बताया कि वह फिलहाल भारत में ही हैं लेकिन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अचानक बैंक के बोर्ड को बदलने के फैसले पर कुछ नहीं कह सकते. आरबीआई द्वारा बैंक पर प्रतिबंध लगाए जाने और खाता धारकों को 50,000 रुपए तक ही निकासी करने के फैसले के एक दिन बाद दिप्रिंट ने कपूर से जब संपर्क किया तो उन्होंने कहा, ‘मैं क्या कह सकता हूं’.

जब उनसे पूछा गया कि बैंक के संस्थापक होने के बावजूद वो कैसे कुछ नहीं कह सकते. इस पर उन्होंने कहा, ‘मैं बैंक का संस्थापक था लेकिन पिछले 14 महीने से मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है. आपको चेयरमैन ब्रह्म दत्त और सीईओ रवनीत गिल से बात करनी चाहिए. पिछले एक साल में बैंक में जो कुछ भी हुआ है उसके लिए ये दोनों ही ज़िम्मेदार हैं.’

मालूम हो कि यस बैंक की स्थापना 2003 में हुई थी और 2005 में इसे स्टॉक एक्सचेंज में सूचित किया गया. अगस्त 2018 में बैंक का मार्केट कैप कई गुना बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. हालांकि यस बैंक पर संकट की खबर ने उसके शेयर को काफी नुकसान पहुंचाया है और उसके शेयर 85 फीसदी तक गिर गए हैं.

कपूर ने इस बात को नकारा कि उन्होंने भारत छोड़ दिया है और वो चार महीने पहले लंदन जा चुके हैं. कपूर ने कहा, ‘मैं अपनी बेटी के बच्चे को देखने दो हफ्तों के लिए गया था. मैं अब वापस मुंबई आ चुका हूं.’  बैंक ने अपने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा है कि कपूर ने दिसंबर के अंत तक पूरी तरह यस बैंक के शेयरहोल्डिंग को छोड़ दिया और अब उनकी कंपनी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बैंक में कोई शेयर नहीं है.

कपूर ने 31 जनवरी 2019 को बैंक के सीईओ का पद छोड़ दिया था. आरबीआई ने 2018 में यस बैंक द्वारा उनके कार्यकाल को तीन साल (अगस्त 2021) तक के लिए बढ़ाने की सिफारिश खारिजज कर दी थी. आरबीआई ने गंभीर रेगुलेटरी लेप्स और कोर्पोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े किए थे और कपूर के कार्यकाल को बढ़ाने पर असंतोष जताया था.

आरबीआई ने अपने उठाए कदम को सही ठहराते हुए कहा, ‘यस बैंक लिमिटेड (बैंक) की वित्तीय स्थिति में बड़े पैमाने पर बैंक की असमर्थता के कारण संभावित रूप से गिरावट आई है, जिससे संभावित ऋण घाटे और परिणामी गिरावट को संबोधित करने के लिए पूंजी जुटाई जा सकती है, जिससे निवेशकों द्वारा बांड के आह्वान को ट्रिगर किया जा सकता है. बैंक ने हाल के वर्षों में गंभीर शासकीय मुद्दों का अनुभव किया है जिसके कारण बैंक को लगातार गिरावट का सामना करना पड़ रहा है.’

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